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पर्व 61

सुग्रीव-भामंडल का नागपाश के बंधन से मुक्त होना

राम-लक्ष्मण के सिंहवाहन और गरुड़वाहन पर रणभूमि में आते ही सुग्रीव और भामंडल का नागपाश का बंधन टूट जाता है।

कथा खंड लंका का युद्ध

सारांश

कवच धारण कर राम और लक्ष्मण अभी-अभी प्राप्त सिंहवाहन और गरुड़वाहन पर चढ़कर रणभूमि में प्रवेश करते हैं। गरुड़वाहन के प्रभाव मात्र से सुग्रीव और भामंडल को बाँधने वाले मायामयी सर्प विलीन हो जाते हैं और दोनों मानो नींद से जागकर उठ खड़े होते हैं। विस्मित विद्याधरों को राम बताते हैं कि यह वैभव देशभूषण-कुलभूषण मुनियों का उपसर्ग दूर करने पर गरुड़ेन्द्र से मिले वर का फल है, और सब साधु-सेवा को कल्याण का सर्वोत्तम कारण मानकर उसकी प्रशंसा करते हैं।

क्या हुआ

5 बिंदु

  1. राम और लक्ष्मण मनोहर कवच पहनकर सिंहवाहन और गरुड़वाहन पर चढ़ते हैं और सिंह तथा गरुड़ की ध्वजाओं के साथ रणभूमि के बीच प्रवेश करते हैं। आगे-आगे लक्ष्मण अपने दिव्य शस्त्रों के तेज से सूर्य को भी लजाते हुए चलते हैं।

  2. हनुमान आदि बड़े-बड़े वानरवंशी योद्धाओं से घिरे लक्ष्मण को विभीषण देखते हैं। गरुड़वाहन और गरुड़ विद्या के प्रभाव से भामंडल और सुग्रीव को बाँधने वाले नागपाश के सर्प विलीन हो जाते हैं और दोनों मानो सुख की नींद से जागकर स्वस्थ उठ खड़े होते हैं।

  3. विस्मित विद्याधर राम-लक्ष्मण की पूजा कर कहते हैं कि ऐसे वाहन, वस्त्र, छत्र, चँवर, रत्न और ध्वजाओं का वैभव उन्होंने कभी नहीं देखा। राम अयोध्या से निकलने के बाद का सारा वृत्तांत सुनाते हैं कि उन्होंने कुलभूषण-देशभूषण मुनियों का उपसर्ग दूर किया, उन मुनियों को केवलज्ञान हुआ, और प्रसन्न गरुड़ेन्द्र ने जो वर दिया था, उसका अभी स्मरण करने पर ये विद्याएँ प्राप्त हुईं।

  4. विद्याधर और वानरवंशी अत्यंत हर्षित होते हैं कि साधु-सेवा का परम फल इसी भव में प्राप्त हुआ। वे कहते हैं कि साधु-सेवा से जैसा कल्याण होता है वैसा माता, पिता, मित्र या भाई भी नहीं कर सकते, और जो साधु-सेवा में मन लगाकर जिनेन्द्र की श्रद्धा करता है, वह बलभद्र-नारायण जैसी महाविभूति पाता है।

  5. मूर्च्छा से मुक्त होकर भामंडल और सुग्रीव भगवान की पूजा करते हैं, और सभी विद्याधर धर्म में दृढ़ श्रद्धा रखते हुए अति प्रीति से राम-लक्ष्मण की सेवा करने लगते हैं। पर्व का उपदेश है कि गुरु-सेवा इस लोक में यश और परलोक में आत्मसुख का कारण है, और गुरुभक्ति ही चारित्र दिलाकर मोक्ष तक पहुँचाती है।