वंशवृक्ष
वंशवृक्ष
पद्मपुराण के सभी वंश, पीढ़ी दर पीढ़ी। कोई वंश चुनें, माता-पिता से संतान तक रेखाओं का अनुसरण करें, और किसी को भी चुनकर जानें कि वे कौन थे और किन पर्वों में आते हैं।
- वंश
- 7
- व्यक्ति
- 227
- राज-परम्पराएँ
- 10
वंश चुनें
इक्ष्वाकु वंश
Ikshvaku Vamsha68 व्यक्ति
सीधे देखें
इनकी संतान
वृक्ष में घूमने के लिए खींचें या स्क्रॉल करें। अधिक जानने के लिए कोई भी कार्ड चुनें।
वृक्ष कैसे पढ़ें
- माता-पिता और संतान
- विवाह
- अनेक पीढ़ियों बाद
- पूरा विवरण दूसरे परिवार या वंश में
- राजाओं की परम्परा
- 63 शलाका पुरुषों में से एक
सभी वंश सूची में
वही वंशवृक्ष एक सरल सूची के रूप में, वंश-वार, पढ़ने, खोजने और स्क्रीन रीडर के लिए।
इक्ष्वाकु वंश56 व्यक्ति
चार महावंशों में प्रथम, जो अंतिम कुलकर नाभिराजा के पुत्र ऋषभदेव से आरम्भ हुआ। भरत के पुत्र अर्ककीर्ति (अर्क अर्थात सूर्य) से इसमें सूर्यवंश की शाखा चली। अजितनाथ और सगर चक्रवर्ती इसी के हैं, और रघु, अनरण्य और दशरथ से होते हुए राम इसी वंश में जन्मे।
चौदह कुलकर13
प्रतिश्रुति, सन्मति, क्षेमंकर, क्षेमंधर, सीमंकर, सीमंधर, विमलवाहन, चक्षुष्मान, यशस्वी, अभिचन्द्र, चन्द्राभ, मरुदेव, प्रसेनजित
- नाभिराजाNabhiraja· चौदहवें और अंतिम कुलकर+ मरुदेवी
- ऋषभदेवRishabhadeva· प्रथम तीर्थंकर+ नंदा, सुनंदा
- भरत चक्रवर्तीBharata Chakravarti· प्रथम चक्रवर्ती+ सुभद्रा
- मरीचिMarichi· ऋषभदेव के पौत्र
- अर्ककीर्तिArkakirti· सूर्यवंश के प्रवर्तक
सूर्यवंश के आरम्भिक राजा29
सितयश, बलांक, सुबल, रवितेज, महाबल, अतिबल, अमृत, सुभद्र, सागर, भद्र, रवितेज, शशी, प्रभूततेज, तेजस्वी, तपबल, अतिवीर्य, सुवीर्य, उदित, पराक्रम, सूर्य, इन्द्रमणि, महेन्द्रजित, प्रभूत, विभु, अविध्वंस, वीतभी, वृषभध्वज, गरुडांक, मृगांक
- धरणीधरDharanidhara· अयोध्या के राजा
- त्रिदशंजयTridashanjaya+ इन्द्ररेखा
- जितशत्रुJitashatru· अयोध्या के राजा
- अजितनाथAjitanatha· दूसरे तीर्थंकर
- विजयसागरVijayasagara+ सुमंगला
- सगर चक्रवर्तीSagara Chakravarti· दूसरे चक्रवर्ती
- भगीरथBhagiratha
- विजयVijaya· अयोध्या के राजा+ हेमचूलिनी
- सुरेन्द्रमन्युSurendramanyu+ कीर्तिसमा
- वज्रबाहुVajrabahu
- पुरंदरPurandara+ पृथ्वीमती
- कीर्तिधरKirtidhara+ सहदेवी
- सुकौशलSukoshala· अयोध्या के राजा और मुनि+ विचित्रमाला
- हिरण्यगर्भHiranyagarbha
- नघोषNaghosha+ सिंहिका
- सौदासSaudasa
- सिंहरथSimharatha
रघु से पहले के राजा23
ब्रह्मरथ, चतुर्मुख, हेमरथ, सत्यरथ, पृथुरथ, पयोरथ, दृढ़रथ, सूर्यरथ, मांधाता, वीरसेन, पृथ्वीमन्यु, कमलबंधु, रविमन्यु, वसंततिलक, कुबेरदत्त, कुंथुभक्त, शतरथ, वीररथ, द्विरदरथ, सिंहदमन, हिरण्यकशिपु, पुंजस्थल, ककुस्थल
- रघुRaghu· अयोध्या के राजा, रघुवंश के नामदाता
- अनरण्यAnaranya· अयोध्या के राजा+ पृथ्वीमती
- अनंतरथAnantaratha
- दशरथDasharatha· अयोध्या के राजा
- रामRama· आठवें बलभद्र
- लवणLavana· राम और सीता के ज्येष्ठ जुड़वाँ पुत्र
- अनंगलवण के पुत्रSon of Anangalavana· राम के बाद अयोध्या के राजा
- अंकुशAnkusha· राम और सीता के कनिष्ठ जुड़वाँ पुत्र
- लक्ष्मणLakshmana· आठवें नारायण (वासुदेव)
- श्रीधरShridhara
- पृथ्वीतिलकPrithvitilaka
- मंगलMangala
- विमलप्रभVimalaprabha
- अर्जुनArjuna
- श्रीकेशीShrikeshi
- सत्यकेशीSatyakeshi
- सुपार्श्वकीर्तिSuparshvakirti
- भरतBharata· वनवास काल में अयोध्या के राजा
- शत्रुघ्नShatrughna· मथुरा के राजा
- भीमरथBhimaratha
- बाहुबलीBahubali· पोदनपुर के स्वामी
सोम वंश1 व्यक्ति
चन्द्रमा की किरणों के समान निर्मल चन्द्रवंश। यह ऋषभदेव की दूसरी रानी के पुत्र बाहुबली के पुत्र सोमयश से चला। इसके राजा सौम्य, महाबल, सुबल, भुजबली आदि पुत्रों को राज्य देकर मुनि बने।
- सोमयशSomayasha· सोमवंश के प्रवर्तक
सोमवंश के राजा4
सौम्य, महाबल, सुबल, भुजबली
विद्याधर वंश58 व्यक्ति
ऋषभदेव के स्वजन नमि और विनमि को धरणेन्द्र से विजयार्ध पर्वत और विद्याएँ मिलीं। उनके वंशज आकाश में विचरने वाले, विद्याओं के स्वामी मनुष्य हैं, जो विजयार्ध की उत्तर और दक्षिण श्रेणियों के नगरों पर राज्य करते हैं। रावण और सुग्रीव दोनों के वंश इसी से निकले।
- नमिNami· विद्याधर वंश के प्रवर्तक
- रत्नमालीRatnamali
आरम्भिक विद्याधर राजा20
रत्नरथ, रत्नचित्र, चन्द्ररथ, वज्रजंघ, वज्रसेन, वज्रदंष्ट्र, वज्रध्वज, वज्रायुध, वज्र, सुवज्र, वज्रभृत, वज्राभ, वज्रबाहु, वज्रांक, वज्रसुंदर, वज्रपाणि, वज्रभानु, वज्रवान, विद्युन्मुख, सुवक्त्र
- विद्युद्दंष्ट्रVidyuddamshtra· विजयार्ध की दोनों श्रेणियों के स्वामी
विद्युद्दंष्ट्र के वंशज42
दृढ़रथ, अश्वधर्मा, अश्वायु, अश्वध्वज, पद्मनाभि, पद्ममाली, पद्मरथ, सिंहवान, मृगोद्धर्मा, मेघास्त्र, सिंहप्रभ, सिंहकेतु, शशांक, चन्द्राह्व, चन्द्रशेखर, इन्द्ररथ, चन्द्ररथ, चक्रधर्मा, चक्रायुध, चक्रध्वज, मणिग्रीव, मण्यंक, मणिभासुर, मणिरथ, मण्यास्य, बिम्बोष्ठ, लम्बिताधर, रक्तोष्ठ, हरिचन्द्र, पूर्णचन्द्र, बालेन्दु, चन्द्रचूड, व्योमचन्द्र, उडुपालन, एकचूड, द्विचूड, त्रिचूड, वज्रचूड, भूरिचूड, अर्कचूड, वह्निजटी, वह्नितेज
- पूर्णघनPurnaghana· चक्रवाल के विद्याधर स्वामी
- सुलोचनSulochana· विहायस्तिलक के विद्याधर स्वामी
- सहस्रनयनSahasranayana· सगर के अधीन दोनों श्रेणियों के स्वामी
- उत्पलमतीUtpalamati· सगर चक्रवर्ती की पटरानी
- विनमिVinami· विद्याधर कुलों के सह-प्रवर्तक
- अतींद्रAtindra· मेघपुर के विद्याधर राजा+ श्रीमती
- देवीDevi
- पुष्पोत्तरPushpottara· रत्नपुर के विद्याधर राजा
- पद्माभाPadmabha
- अशनिवेगAshanivega· रथनूपुर के राजा, दोनों श्रेणियों के स्वामी
- विजयसिंहVijayasimha
- सहस्रारSahasrara· रथनूपुर के राजा+ मानसुंदरी
- रथनूपुर के इन्द्रIndra of Rathanupura· इन्द्र कहलाने वाले विद्याधर सम्राट
- जयंतJayanta
- व्योमबिंदुVyomabindu· कौतुकमंगल के विद्याधर राजा+ मंदवती
- कौशिकीKaushiki+ विश्रव
- केकसीKekasi· रावण की माता
- वैश्रवणVaishravana· इन्द्र का लंका स्थित लोकपाल
- मयMaya· असुरसंगीत के राजा, दैत्यों के स्वामी+ हेमवती
- मंदोदरीMandodari· रावण की पटरानी
- मेघप्रभMeghaprabha· विद्याधर राजा
- खरदूषणKharadushana· पाताल लंका के स्वामी
- शंबूकShambuka· रावण का भानजा
- सुंदSunda
- अनंगकुसुमाAnangakusuma· हनुमान की रानी
- प्रह्लादPrahlada· आदित्यपुर के विद्याधर राजा+ केतुमती
- पवनंजयPavananjaya· आदित्यपुर के राजकुमार
- हनुमानHanuman· कामदेव, हनुरुह और श्रीपुर के स्वामी
- चित्रभानुChitrabhanu· हनुरुह द्वीप के राजा+ सुंदरमालिनी
- प्रतिसूर्यPratisurya· हनुरुह द्वीप के स्वामी, अंजना के मामा
- महेन्द्रMahendra· महेन्द्रपुर के राजा+ हृदयवेगा
- अंजनाAnjana· हनुमान की माता
- प्रसन्नकीर्तिPrasannakirti
- वज्रमुखVajramukha· लंका के मायामयी कोट का रक्षक
- लंकासुंदरीLankasundari
- अग्निशिखAgnishikha· ज्योतिपुर के राजा
- सुताराSutara· सुग्रीव की पटरानी
- चक्रांकChakranka
- साहसगतिSahasagati· मायावी सुग्रीव
- चन्द्रोदरChandrodara· खरदूषण से पहले पाताल लंका के स्वामी+ अनुराधा
- विराधितViradhita· लक्ष्मण के मित्र, अलकापुरी के स्वामी
- चन्द्रगतिChandragati· रथनूपुर के विद्याधर राजा+ पुष्पवती
- वरुणVaruna· पाताल के पुंडरीकपुर के स्वामी
- सत्यवतीSatyavati
- श्रीमालाShrimala
राक्षस वंश28 व्यक्ति
अजितनाथ के समय विद्याधर कुमार मेघवाहन समवशरण की शरण में आया, और राक्षसों के इन्द्र भीम ने उसे लंका, पाताल लंका और एक दिव्य हार दिया। आगे चलकर राक्षस नाम के राजा से यह वंश राक्षस वंश कहलाया। इसके लोग विद्याधर हैं, दैत्य नहीं; रावण इसी वंश का आठवाँ प्रतिनारायण है।
- मेघवाहनMeghavahana· लंका के राक्षस वंश के संस्थापक
- महारक्षMaharaksha
- अमररक्षAmararaksha
- महारक्ष (द्वितीय)Maharaksha II
- राक्षसRakshasa· जिनके नाम से वंश राक्षस कहलाया
- आदित्यगतिAdityagati
- भीमप्रभBhimaprabha
लंका के राजा49
पूजार्ह, जितभास्कर, संपरिकीर्ति, सुग्रीव, हरिग्रीव, श्रीग्रीव, सुमुख, सुव्यक्त, अमृतवेग, भानुगति, चिन्तागति, इन्द्रप्रभ, मृगारिदमन, पवि, इन्द्रजीत, भानुवर्मा, भानु, मुरारी, त्रिजीत, भीम, मोहन, उद्धारक, रवि, चाकर, वज्रमध्य, प्रबोध, सिंहविक्रम, चामुंड, भीष्म, धुपवाहु, अरिदमन, निर्वाणभक्ति, उग्रक्षी, अर्हद्भक्त, अनुत्तर, अनिल, लंक, चंड, मयूरवाहन, महाबाहु, मनोरम्य, भास्करप्रभ, बृहद्गति, बृहत्कांत, अरिसंत्रास, चन्द्रावर्त, मेघवाहन, गृहक्षोभ, नक्षत्रदमन
- धनप्रभDhanaprabha
- कीर्तिधवलKirtidhavala· लंका के स्वामी
- विद्युत्केशVidyutkesha· मुनिसुव्रत के काल में लंका के राजा
- सुकेशSukesha
- मालीMali· लंका के राजा
- सुमालीSumali· रावण के दादा
- रत्नश्रवाRatnashrava· रावण के पिता
- रावणRavana· आठवें प्रतिनारायण, तीन खंडों के स्वामी
- इन्द्रजीतIndrajit· रावण का ज्येष्ठ पुत्र
- मेघनादMeghanada
- कृतचित्राKritachitra
- कुंभकर्णKumbhakarna· रावण के भाई
- कुंभKumbha
- चन्द्रनखाChandranakha· रावण की बहन, पाताल लंका की रानी
- विभीषणVibhishana· रावण के बाद लंका के राजा
- सुभूषणSubhushana· विभीषण के बाद लंका के राजा
- माल्यवानMalyavan
- श्रीमालीShrimali
- बृहत्कीर्तिBrihatkirti
- उदधिरक्षUdadhiraksha
- भानुरक्षBhanuraksha
वानर वंश26 व्यक्ति
मेघपुर के विद्याधर कुमार श्रीकंठ को उसके बहनोई, लंका के कीर्तिधवल ने वानरद्वीप दिया, जहाँ उसने किष्कुपुर बसाया। आगे राजा अमरप्रभ ने ध्वजाओं और मुकुटों पर वानर के चिह्न लगवाए, जिससे यह कुल वानरवंशी कहलाया। बाली, सुग्रीव, नल, नील और अंगद इसके वीर हैं।
- श्रीकंठShrikantha· वानर वंश के संस्थापक
- वज्रकंठVajrakantha
- इन्द्रायुधप्रभIndrayudhaprabha
- रविप्रभRaviprabha
- अमरप्रभAmaraprabha· मुकुट और ध्वजा पर वानर चिह्न लगाने वाले राजा
- कपिकेतुKapiketu
- विक्रमसंपन्नVikramasampanna
- प्रतिबलPratibala
महोदधि से पहले के वानर राजा3
गगनानंद, खेचरानंद, गिरिनंद
- महोदधिMahodadhi· मुनिसुव्रत के काल में किष्कुपुर के वानर राजा
- प्रतिचन्द्रPratichandra
- किष्किंधKishkindha· किष्किंधापुर के संस्थापक
- सूर्यरजSuryaraja· किष्किंधापुर के राजा+ चन्द्रमालिनी
- बालीBali· किष्किंधापुर के राजा, फिर महामुनि
- चन्द्ररश्मिChandrarashmi
- सुग्रीवSugriva· किष्किंधापुर के राजा
- अंगदAngada· सुग्रीव के बाद किष्किंधापुर के राजा
- अंगAnga
- पद्मरागाPadmaraga
- श्रीप्रभाShriprabha
- ऋक्षरजRiksharaja· किष्कुपुर के स्वामी
- नलNala· किष्कुपुर के स्वामी
- हरिमालिनीHarimalini
- नीलNila
- सूर्यकमलाSuryakamala
- अंध्रकAndhraka
हरिवंश17 व्यक्ति
शीतलनाथ के बाद कौशाम्बी के राजा सुमुख और वनमाला विद्याधर दम्पति के रूप में जन्मे और एक देव उन्हें हरिक्षेत्र से ले आया, इसलिए वे हरि कहलाए। उनके वंश में बीसवें तीर्थंकर मुनिसुव्रतनाथ हुए और आगे मिथिला के राजा जनक, सीता और भामंडल के पिता।
- हरिHari· हरिवंश के संस्थापक
हरिवंश के आरम्भिक राजा7
महागिरि, हिमगिरि, वसुगिरि, इन्द्रगिरि, रत्नमाला, संभू, भूतदेव
- सुमित्रSumitra· कुशाग्रनगर के राजा
- मुनिसुव्रतनाथMunisuvrata· बीसवें तीर्थंकर
- सुव्रतSuvrata
- दक्षDaksha
- ऐलावर्धनAilavardhana
मुनिसुव्रत के बाद के हरिवंशी राजा6
श्रीवर्धन, श्रीवृक्ष, संजयंत, कुणिम, महारथ, पुलोम
- वासवकेतुVasavaketu· मिथिला के राजा+ विपुला
- जनकJanaka· मिथिला के राजा+ विदेहा
- सीताSita· राम की पटरानी
- भामंडलBhamandala· विद्याधरों के अधिपति
- कनकKanaka· जनक के छोटे भाई, बाद में मिथिला के राजा
- लोकसुंदरीLokasundari
- हरिवाहनHarivahana· मथुरा के राजा
- मधुMadhu· मथुरा के राजा, हरिवंश के तिलक
- लवणार्णवLavanarnava
सम्बद्ध राजकुल41 व्यक्ति
विवाह और मैत्री से महावंशों से जुड़े राज्य: कैकेयी का कौतुकमंगल, कौशल्या का दर्भस्थल, सुमित्रा का कमलसंकुल, वनमाला का विजयपुर, कल्याणमाला का नलकूवर, वज्रजंघ का पुंडरीकपुर और अन्य।
- विजयाVijaya· अजितनाथ की माता
- मनोदयाManodaya
- सुप्रभाSuprabha
- राजीवसरसीRajivasarasi
- सुंदरमालिनीSundaramalini
- कौशलKaushala· दर्भस्थल के राजा
- अपराजिताAparajita· दशरथ की पटरानी, राम की माता
- सुबंधुतिलकSubandhutilaka· कमलसंकुल के राजा
- सुमित्राSumitra· दशरथ की रानी, लक्ष्मण की माता
- शुभमतिShubhamati· कौतुकमंगल के राजा
- कैकेयीKaikeyi· दशरथ की रानी, भरत की माता
- द्रोणमेघDronamegha· कैकेयी के भाई
- विशल्याVishalya· लक्ष्मण की प्रथम पटरानी
- महाराजMaharaja
- सुप्रभाSuprabha· दशरथ की रानी, शत्रुघ्न की माता
- पृथ्वीधरPrithvidhara· विजयपुर के राजा
- वनमालाVanamala· लक्ष्मण की पटरानी
- बालिखिल्यBalikhilya· नलकूवर के राजा
- कल्याणमालाKalyanamala· लक्ष्मण की पटरानी
- शत्रुदमनShatrudamana· क्षेमांजलि के राजा
- जितपद्माJitapadma· लक्ष्मण की पटरानी
- अतिवीर्यAtivirya· नंद्यावर्त के राजा
- विजयरथVijayaratha
- रत्नमालाRatnamala
- विजयसुंदरीVijayasundari
- रूपवतीRupavati· लक्ष्मण की दूसरी पटरानी
- रतिमालाRatimala
- भगवतीBhagavati
- मनोरमाManorama
- पद्मावतीPadmavati
- प्रभावतीPrabhavati
- रतिप्रभाRatiprabha
- श्रीदामाShridama
- वज्रजंघVajrajangha· पुंडरीकपुर के राजा, सीता के रक्षक
- शशिचूलाShashichula
- पृथुPrithu· पृथ्वीपुर के राजा
- कनकमालाKanakamala
- मंदाकिनीMandakini
- चन्द्रवक्त्राChandravaktra
- मरुतMarutta· राजपुर के राजा
- कनकप्रभाKanakaprabha